कैसे बनाया यशस्वी ने वनडे करियर का पहला शतक?
सिर्फ चौथा वनडे खेल रहे 23 वर्षीय यशस्वी ने जिस तरह धैर्य और समझदारी से बल्लेबाजी की, उसने हर किसी को प्रभावित किया। वह शुरुआत में थोड़ा नर्वस थे क्योंकि पिछले दो मैचों में सेट होकर भी बड़ी पारी नहीं खेल पाए थे। लेकिन इस बार उन्होंने खुद को संभाला और बड़े मैच में बड़ी पारी खेलकर दिखाया।
शुरुआत में दिक्कतें थीं, लेकिन रोहित ने संभाला
यशस्वी मानते हैं कि पारी की शुरुआत में वह थोड़ा नर्वस थे। सीरीज के पिछले दो मैचों में वह अच्छी शुरुआत करके आउट हो चुके थे। इसलिए तीसरे मैच में वह ज्यादा जिम्मेदारी के साथ उतरे थे। लेकिन शुरुआती ओवरों में साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।
ऐसे समय में दूसरे छोर पर खड़े थे—
रोहित शर्मा: शांत, अनुभवी और बेहद समझदार कप्तान
रोहित ने पहले 10–12 ओवरों में खुद स्ट्राइक रोटेट की, ज्यादा स्कोरिंग की कोशिश की और यशस्वी को सेट होने का समय दिया।
यशस्वी के शब्दों में:
“रोहित भाई बिल्कुल शांत थे। वो बार-बार कहते थे— 'घबराना मत, बस टिके रहो। स्ट्राइक घुमाओ, धीरे-धीरे रन आएंगे।' उनकी यह बात मेरे दिमाग में बैठ गई।”
एक वक्त ऐसा भी आया जब यशस्वी ने तेज हाफ सेंचुरी लगने के बाद कुछ एग्रेसिव शॉट खेलने शुरू कर दिए। लेकिन तभी रोहित उनके पास आए और उन्हें शांत रहने के लिए कहा।
यशस्वी बताते हैं—
“जब मेरा पचास पूरा हुआ, मैं थोड़ा एक्साइटेड होकर तेज खेलना चाहता था। तभी रोहित भाई दौड़कर आए और बोले— ‘शांत हो जा, प्लान पर टिके रह।’ इस एक बात ने मेरा पूरा माइंडसेट बदल दिया।”
यह वही मोमेंट था जिसने यशस्वी की पारी को संभाला और उन्हें बड़े स्कोर तक पहुंचाया।
विराट कोहली आए तो गियर बदल गया
रोहित शर्मा के आउट होने के बाद क्रीज पर आए विराट कोहली। और बस फिर क्या था—मैच का मोमेंटम पूरी तरह भारत के हाथ में आ गया।
विराट जैसे ही मैदान पर आए, उन्होंने यशस्वी को एक सीनियर की तरह गाइड किया।
यशस्वी कहते हैं:
“विराट भाई आते ही बोले— छोटे-छोटे टारगेट बनाते हैं। अगले 5 ओवर शांत खेलो, फिर मौका मिलते ही बाउंड्री निकाल लेना। वो लगातार स्ट्राइक रोटेट करने की बात करते रहे। इससे मुझे बहुत मदद मिली।”
विराट की बैटिंग ने भी प्रेशर कम किया। उन्होंने आते ही 360° शॉट्स खेलने शुरू कर दिए, जिससे गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा और यशस्वी को भी खुलकर खेलने का मौका मिला।
शतक का पल— सपना सच हुआ
जब यशस्वी 90 के पार पहुंचे तो भारतीय ड्रेसिंग रूम में भी उत्सुकता बढ़ गई थी। हर कोई इंतजार कर रहा था कि यह युवा खिलाड़ी अपनी पहली वनडे सेंचुरी पूरी करे।
94…
97…
99…
और फिर—
एक शानदार कवर ड्राइव!
गेंद दौड़ती हुई बाउंड्री लाइन के पार गई।
यशस्वी ने बल्ला हवा में उठाया, आंखें बंद कीं और आसमान की तरफ देखा। यह पल उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। सिर्फ 23 साल की उम्र में शतक बनाकर उन्होंने भारतीय टीम को मैच और सीरीज दोनों जिताने में बड़ी भूमिका निभाई।
उनकी पारी में शामिल थे—
116 रन (नॉटआउट)
12 चौके
3 छक्के
धैर्य और धमाकेदार शॉट्स का परफेक्ट मिश्रण
भारत की जीत: एकतरफा मुकाबला
साउथ अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 270 का स्कोर खड़ा किया, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने इसे बच्चों का खेल बना दिया।
रोहित शर्मा – 75 (73 गेंद)
यशस्वी जायसवाल – 116 (नाबाद)*
विराट कोहली – 65 (45 गेंद)*
भारत ने सिर्फ 39.5 ओवर में मैच समाप्त कर दिया।
रोहित और यशस्वी के बीच 155 रनों की साझेदारी ने मैच का खेल बदल दिया था।
विराट के आने के बाद तो साउथ अफ्रीकी गेंदबाज पूरी तरह थक गए और मैच एकतरफा हो गया।
निष्कर्ष: भारत को मिला भविष्य का सुपरस्टार
भारत की यह जीत तो शानदार थी ही, लेकिन असली खुशी इस बात की है कि भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिल गया है—
यशस्वी जायसवाल
उनकी:
फिटनेस
बैटिंग क्लास
मैच की समझ
और सीखने की भूख
उन्हें आने वाले वर्षों में भारत का महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना सकती है।
रोहित शर्मा और विराट कोहली के मार्गदर्शन में वह जिस तरह आगे बढ़ रहे हैं, उससे लगता है कि आने वाले समय में यह बल्लेबाज कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम करेगा।
0 टिप्पणियाँ